हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में पर्याप्त अग्नि सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी और आग लगने के बाद अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई लोगों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
यह त्रासदी केवल एक निजी अस्पताल की नहीं, बल्कि बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है। यदि सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं, ICU बेड और बेहतर चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध होती, तो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को निजी अस्पतालों का सहारा लेने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता। यह सवाल अब आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।
मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को सहायता राशि देने की घोषणा की है, वहीं विपक्ष और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच जारी है। शुरुआती रिपोर्टों में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, लेकिन प्रशासन ने कहा है कि विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट होगा।
सवाल अब भी बाकी है—आखिर इन मासूम जिंदगियों का जिम्मेदार कौन है? अस्पताल प्रबंधन, प्रशासन या फिर वर्षों से बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था?

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