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KCC लोन में देरी करना बैंक मैनेजर को पड़ा भारी, उपभोक्ता आयोग ने लगाया ₹30 हजार का जुर्माना

सांकेतिक तस्वीर

  1. उपभोक्ता आयोग ने बैंक मैनेजर पर ₹30,000 का जुर्माना लगाया।

  2. किसान क्रेडिट कार्ड लोन देने में देरी पर फैसला सुनाया।

  3. बैंक को सेवा में कमी का दोषी पाया गया।

संवाददाता, सासाराम। किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण स्वीकृत करने में कथित देरी और बैंकिंग सेवा में कमी के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने करीब छह वर्ष बाद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने कॉरपोरेशन बैंक (वर्तमान में यूनियन बैंक) के तत्कालीन शाखा प्रबंधक कृष्णा कुमार और बैंक के जोनल महाप्रबंधक पर कुल 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

आयोग ने अपने आदेश में बैंक को निर्देश दिया है कि 60 दिनों के भीतर परिवादी किसान को 30 हजार रुपये की राशि का भुगतान किया जाए। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर वास्तविक भुगतान की तारीख तक उक्त राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देय होगा।

दस्तावेज जमा करने के बाद भी नहीं मिला KCC लोन

मामला रोहतास जिले के करगहर थाना क्षेत्र अंतर्गत सोनी गांव निवासी शिव शंकर तिवारी से जुड़ा है। किसान ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण के लिए सासाराम के कचहरी स्थित कॉरपोरेशन बैंक (वर्तमान यूनियन बैंक) की शाखा में आवेदन दिया था।

किसान के अनुसार, बैंक प्रबंधक के निर्देश पर उन्होंने ऋण से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज बैंक में जमा कर दिए थे। इसके अलावा बैंक द्वारा विभिन्न शुल्क के नाम पर उनसे कुल 7,560 रुपये भी जमा कराए गए। इसके बावजूद उन्हें ऋण उपलब्ध नहीं कराया गया।

बैंक मैनेजर पर ₹40 हजार अतिरिक्त मांगने का आरोप

परिवादी किसान का आरोप है कि जमीन की जांच, आवश्यक दस्तावेज और बैंक शुल्क जमा करने के बाद भी तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने ऋण स्वीकृत करने के एवज में 40 हजार रुपये अतिरिक्त राशि की मांग की थी।

किसान ने जब कथित तौर पर उक्त राशि देने से इनकार कर दिया, तो आरोप है कि बैंक प्रबंधक ने मामले को करीब दो वर्षों तक लंबित रखा। इससे किसान को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।

छह साल बाद आया उपभोक्ता आयोग का फैसला

बैंक प्रबंधक के कथित रवैये से परेशान होकर किसान ने वर्ष 2019 में न्याय के लिए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का दरवाजा खटखटाया। मामले की लंबी सुनवाई के दौरान परिवादी की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और तथ्यों पर विचार करने के बाद आयोग ने बैंकिंग सेवा में कमी पाए जाने पर किसान के पक्ष में फैसला सुनाया।

आयोग ने किसान को हुई शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक क्षति तथा मुकदमे में हुए खर्च को ध्यान में रखते हुए बैंक को एकमुश्त 30 हजार रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। साथ ही, निर्धारित समय सीमा में राशि का भुगतान नहीं करने पर 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देने का भी निर्देश दिया गया है।

इस फैसले को बैंकिंग सेवाओं में पारदर्शिता और उपभोक्ताओं के अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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