करवंदिया पहाड़ी के सीमांकन के लिए सात अमीनों की प्रतिनियुक्ति, प्रशासन ने शुरू की मापी; उद्योग चालू होने से हजारों लोगों को मिलेगा रोजगार...
करवंदिया पहाड़ी की मापी के लिए लगाए गए सात अमीन।
HighLights
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विशेष संवाददाता: अनिल रोहतासी
सासाराम (रोहतास)।
करीब 14 वर्षों से बंद पड़े रोहतास जिले के पत्थर उद्योग को फिर से शुरू करने की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ी पहल की है। राज्य सरकार के निर्देश पर करवंदिया पहाड़ी स्थित बंद खनन क्षेत्र की मापी और सीमांकन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसके लिए जिले के विभिन्न अंचलों से सात अमीनों की प्रतिनियुक्ति की गई है। प्रशासन की इस कार्रवाई से यह उम्मीद जगी है कि जल्द ही जिले में एक बार फिर क्रशर मशीनों की आवाज सुनाई देगी और लंबे समय से बंद पड़ा पत्थर उद्योग दोबारा संचालित हो सकेगा।
अपर समाहर्ता (राजस्व) ललित भूषण रंजन द्वारा जारी आदेश के अनुसार करवंदिया पहाड़ी के सीमांकन कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए सात अंचल अमीनों को सासाराम सदर अंचल में प्रतिनियुक्त किया गया है। इनमें सासाराम के विक्की कुमार, करगहर के विकास कुमार, नोखा के संजीव कुमार, संझौली के आदित्य कुमार, डेहरी के मोहम्मद इमरान, अकोढ़ीगोला के विकास कुमार तथा तिलौथू के इम्तियाज अहमद शामिल हैं।
एडीएम (राजस्व) ने सासाराम सदर अंचलाधिकारी को निर्देश दिया है कि वे जिला खनिज विकास पदाधिकारी के साथ समन्वय स्थापित करते हुए प्रतिनियुक्त अमीनों की देखरेख में सीमांकन का कार्य तत्काल शुरू कराएं। साथ ही सीमांकन और मापी कार्य की दैनिक प्रगति रिपोर्ट जिला पदाधिकारी को उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया है।
2012 से बंद पड़ा है पत्थर उद्योग
गौरतलब है कि जून 2012 में अवैध खनन पर रोक लगाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने करवंदिया पहाड़ी को पूरी तरह खनन मुक्त घोषित कर दिया था। इसके बाद पत्थर की उपलब्धता समाप्त होने के कारण जिले में संचालित लगभग 400 क्रशर मशीनों के लाइसेंस एक-एक कर रद्द कर दिए गए। परिणामस्वरूप रोहतास का पत्थर उद्योग पूरी तरह ठप हो गया और इससे जुड़े हजारों श्रमिकों, ट्रांसपोर्टरों, मशीन संचालकों तथा छोटे व्यापारियों की आजीविका प्रभावित हुई।
रोजगार की नई उम्मीद
अब प्रशासन की ओर से सीमांकन की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद यह माना जा रहा है कि खदानों के बंदोबस्त की प्रक्रिया भी जल्द प्रारंभ हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो वर्षों से बंद पड़े पत्थर उद्योग को नई जिंदगी मिलेगी। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे, बल्कि जिले की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
पत्थर उद्योग से जुड़े व्यवसायियों और मजदूरों की निगाहें अब जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। उनका मानना है कि यदि खनन और क्रशर संचालन को नियमों के तहत दोबारा अनुमति मिलती है, तो रोहतास एक बार फिर बिहार के प्रमुख पत्थर उत्पादन क्षेत्रों में अपनी पहचान बना सकेगा।
प्रशासनिक गतिविधियां तेज
जिला प्रशासन का कहना है कि सीमांकन का कार्य पूरी पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के अनुरूप कराया जाएगा। मापी पूरी होने के बाद आगे की प्रक्रिया राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ाई जाएगी।
लगभग डेढ़ दशक बाद पत्थर उद्योग को पुनर्जीवित करने की इस पहल से रोहतास के लोगों में नई उम्मीद जगी है। यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी होती हैं, तो आने वाले समय में करवंदिया क्षेत्र एक बार फिर खनन और क्रशर उद्योग की गतिविधियों से गुलजार दिखाई दे सकता है।
— इंडिया A To Z News
विशेष संवाददाता: अनिल रोहतासी
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