सरकार का यह आदेश 1 अगस्त 2026 से 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। कमजोर मानसून के अनुमान के बीच चीनी की कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए केंद्र सरकार पहले ही चीनी के निर्यात पर रोक लगा चुकी है।
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जारी हुआ आदेश
खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर बताया कि यह पाबंदी आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 और चीनी (नियंत्रण) आदेश, 2025 के तहत प्राप्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए लगाई गई है।
हालांकि, यह स्टॉक सीमा सरकारी खाते में रखे गए चीनी भंडार पर लागू नहीं होगी। इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा चयनित डीलर या अधिकृत अधिकारी द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से वितरण के लिए रखे गए चीनी स्टॉक को भी इस आदेश से बाहर रखा गया है।
राज्यों को भी स्टॉक सीमा तय करने का अधिकार
केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन से कहा है कि वे अपने स्तर पर स्टॉक रखने और कारोबार की सीमाएं तय कर सकते हैं। हालांकि, राज्य स्तर पर तय की जाने वाली स्टॉक सीमा और कारोबार की अवधि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित सीमा और अवधि से अधिक नहीं होनी चाहिए।
देश में चीनी का पर्याप्त भंडार होने का दावा
चीनी उद्योग से जुड़े संगठन ISMA और NFCSF ने 17 जुलाई को कहा था कि देश में चीनी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। संगठनों ने संस्थागत खरीदारों के साथ-साथ थोक और खुदरा व्यापारियों से कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बीच सट्टेबाजी वाली खरीदारी से बचने की अपील की थी।
वहीं, ISMA ने विपणन वर्ष 2025-26 के लिए एथनॉल उत्पादन में इस्तेमाल के बाद चीनी का कुल उत्पादन करीब 2.93 करोड़ टन रहने का अनुमान जताया है। यह 2024-25 में दर्ज करीब 2.612 करोड़ टन के उत्पादन से अधिक है।
केंद्र सरकार की नई स्टॉक लिमिट का उद्देश्य बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना, जमाखोरी और सट्टेबाजी पर अंकुश लगाना तथा कीमतों को नियंत्रित रखना है। नए नियमों के लागू होने के बाद चीनी के थोक और खुदरा कारोबार पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
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