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रोहतास: 25 साल बाद करवंदिया पहाड़ में फिर शुरू होगा खनन कार्य, हजारों रोजगार की उम्मीद....

संवाददाता अनिल रोहतासी l रोहतास जिले के लिए राहत और उम्मीद भरी खबर सामने आई है। करीब ढाई दशक से बंद पड़े करवंदिया पहाड़ में एक बार फिर पत्थर खनन कार्य शुरू करने की तैयारी सरकार ने तेज कर दी है।

हाल ही में राज्य के विकास आयुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में जिले के चिह्नित पत्थर भूखंडों को बंदोबस्त करने की प्रक्रिया जल्द शुरू करने का निर्णय लिया गया।

निर्देश दिया गया है कि जिन भूखंडों को वन, पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग से अनापत्ति मिल चुकी है तथा जिनका जिला सर्वेक्षण प्रतिवेदन तैयार है या अंतिम चरण में है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया जाए।

यदि सब कुछ योजना के अनुसार चला, तो 25 वर्षों से वीरान पड़ी करवंदिया पहाड़ी एक बार फिर मजदूरों की आवाजाही से गुलजार हो उठेगी।

 हजारों लोगों को मिलेगा रोजगार

खनन कार्य शुरू होने से सिर्फ रोहतास ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों और पड़ोसी राज्यों झारखंड, उत्तर प्रदेश व पश्चिम बंगाल के हजारों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

अमरा-तालाब, करवंदिया-बांसा जैसे इलाकों में लगने वाले साप्ताहिक बाजारों में भी रौनक लौटने की उम्मीद जताई जा रही है।

 काले पत्थर के लिए मशहूर है करवंदिया पहाड़

करवंदिया पहाड़ी उच्च गुणवत्ता वाले काले पत्थर के लिए वर्षों से प्रसिद्ध रही है। यहां से निकलने वाली गिट्टी और पत्थर की मांग कई राज्यों में रही है। पहले यहां से सिलवट, जांता समेत कई उत्पाद बनाकर बाहर भेजे जाते थे।

 क्रशर उद्योग को लगा था बड़ा झटका

खनन बंद होने का सबसे बड़ा असर जिले के क्रशर उद्योग पर पड़ा था। पहले करीब 400 क्रशर मशीनों को लाइसेंस दिया गया था, लेकिन खनन पट्टों की अवधि समाप्त होने के साथ मशीनों की अनुज्ञप्ति भी रद्द होती गई।

अगस्त 2011 में 31 क्रशर मशीनों का लाइसेंस रद्द किया गया था, जबकि अप्रैल 2013 तक शेष 121 मशीनों की अनुज्ञप्ति भी समाप्त कर दी गई थी। इससे उद्योगपतियों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ था।

 क्या बोले अधिकारी?

जिला खनन पदाधिकारी रणधीर कुमार ने बताया कि विभागीय निर्देश के तहत पत्थर खदानों का जिला सर्वेक्षण अंतिम चरण में है। राज्य सरकार की मंजूरी मिलते ही चिह्नित खदानों के बंदोबस्त की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

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