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पीएम मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन पर कांग्रेस और एक्सपर्ट्स क्यों लगा रहे हैं राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप?

 

कांग्रेस ने पीएम मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन की आलोचना की है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयक पास नहीं होने के लिए कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, समाजवादी पार्टी और विपक्षी दलों को ज़िम्मेदार ठहराया.

राष्ट्र के नाम अपने संबोधन की शुरुआत में ही पीएम मोदी ने कहा, "देश की करोड़ों महिलाओं की नज़र संसद पर थी. मुझे भी देखकर दुख हुआ कि नारी शक्ति का ये प्रस्ताव जब गिरा तो कांग्रेस, सपा, टीएमसी, डीएमके जैसी परिवारवादी पार्टियां ख़ुशियां मना रही थीं. ऐसे लोगों को इस देश की महिलाएं कभी माफ़ नहीं करेंगी."

क़रीब 30 मिनट के इस संबोधन में पीएम मोदी ने कई बार कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके समेत तमाम विपक्षी दलों का ज़िक्र किया. उन्होंने कहा, "कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और समाजवादी पार्टी जैसी पार्टियों की स्वार्थी राजनीति का नुक़सान देश की नारी शक्ति को उठाना पड़ा है."

लेकिन कांग्रेस पार्टी ने पीएम मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन की आलोचना की है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि "पीएम नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन का राजनीतिक इस्तेमल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, "एक हताश और निराश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 12 सालों में कुछ भी सार्थक न कर पाने के कारण, राष्ट्र के नाम अपने आधिकारिक संबोधन को कीचड़ उछालने और सरासर झूठ से भरे राजनीतिक भाषण में बदल दिया."

"आचार संहिता पहले से ही लागू है और यह स्पष्ट था कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने विरोधियों पर हमला करने के लिए सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कैसे किया. यह लोकतंत्र और भारत के संविधान का घोर अपमान है."

उन्होंने कहा, "मोदी जी ने कांग्रेस का 59 बार ज़िक्र किया और महिलाओं का केवल कुछ ही बार. इससे देश को उनकी प्राथमिकताओं के बारे में सब कुछ पता चल जाता है."माल किया है."  

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में वोटिंग होनी है. 17 अप्रैल को ममता बनर्जी एक रैली में

राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर हैरानी जता रहे हैं कि पीएम मोदी ने जिस तरह से राष्ट्र के नाम संबोधन के ज़रिए विपक्षी दलों को घेरने की कोशिश की है, वैसी आज तक कभी किसी प्रधानमंत्री ने नहीं की थी.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिस तरह से पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कांग्रेस के साथ, टीएमसी और डीएमके को निशाने पर लिया है, उसके ज़रिए उनकी नज़र इन दोनों राज्यों में होने वाले चुनाव में महिला वोटर्स को साधने की है.

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में वोटिंग होनी है. वहीं तमिलनाडु में एक चरण में सभी विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होनी है.

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली सरकार बीते तीन चुनाव से सत्ता में है. 2014 में केंद्र सरकार बनाने के बाद से ही बीजेपी की नज़र पश्चिम बंगाल पर रही है. 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी बनने में भी कामयाब हो गई थी.

हालांकि, तमिलनाडु में बीजेपी को अभी तक कोई ख़ास सफलता नहीं मिल पाई है. लेकिन दक्षिण भारत के राज्यों में विस्तार करना हमेशा से ही बीजेपी के मुख्य एजेंडा में से एक रहा है.

इन दोनों राज्यों में चुनाव से ठीक पहले 131वें संशोधन विधेयक को संसद के स्पेशल सेशन के ज़रिए लाने की सरकार की मंशा पर विपक्षी दल और एक्सपर्ट दोनों ही सवाल उठा रहे हैं.

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, "प्रधानमंत्री ने अपने संविधान संशोधन बिल को लोकसभा से पारित न करा पाने के लिए माफ़ी मांगी है. लेकिन वास्तव में उन्हें महिलाओं के नाम पर परिसीमन के एक कुटिल प्रस्ताव को ज़बरदस्ती पारित कराने के अपने बेशर्मी और कपट से भरे प्रयासों के लिए माफ़ी मांगनी चाहिए थी."

"इस पूरे मामले में उनकी नीयत साफ़ नहीं, स्पष्ट रूप से खोटी है. अगर उनकी नीयत को समझना हो, तो यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023', जो सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पास हो गया था, उसे 30 महीने की देरी के बाद 16 अप्रैल 2026 की देर रात को अधिसूचित क्यों किया गया."


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