संवाददाता: अनिल रोहतासी | रोहतास जिले की सासाराम पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 86 लाख रुपये के फर्जी लेन-देन मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह महाराष्ट्र से जुड़े मामलों में सक्रिय बताया जा रहा है और डिजिटल माध्यम से लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर भारी रकम का ट्रांजैक्शन करता था। पुलिस ने इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता बताया है।
इस पूरे मामले की शुरुआत 2 मई को हुई, जब शिवसागर थाना क्षेत्र के निवासी मदन गोपाल पांडेय ने पुलिस को सूचना दी कि उनके बैंक खाते का उपयोग साइबर अपराधियों द्वारा अवैध तरीके से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनके खाते में बड़ी मात्रा में रकम जमा और निकासी की गई है, जिसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। शिकायत मिलते ही पुलिस हरकत में आई और मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी गई।
रोहतास के पुलिस अधीक्षक (एसपी) रौशन कुमार के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम का नेतृत्व पुलिस उपाधीक्षक सह साइबर थानाध्यक्ष गौरव कुमार यादव को सौंपा गया। टीम ने तकनीकी अनुसंधान और बैंकिंग डाटा के विश्लेषण के जरिए मामले की तह तक जाने का प्रयास शुरू किया। जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
तकनीकी जांच में यह पाया गया कि मदन गोपाल पांडेय के बैंक खाते से जुड़े दो अलग-अलग साइबर अपराध के मामले महाराष्ट्र में दर्ज हैं। इन मामलों में डिजिटल अरेस्ट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए पीड़ितों से पैसे ठगे गए थे। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि पांडेय के खाते में कुल 86 लाख रुपये का लेन-देन हुआ था, जिसमें से एक मामले में 48 लाख रुपये और दूसरे में 38 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे।
पुलिस को संदेह हुआ कि यह एक संगठित गिरोह है, जो विभिन्न राज्यों में फैले नेटवर्क के जरिए काम करता है। इसके बाद टीम ने मोबाइल नंबर, बैंक ट्रांजैक्शन डिटेल्स, आईपी एड्रेस और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान शुरू की। लगातार निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग के बाद पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे, जिससे आरोपियों के वाराणसी में होने की जानकारी मिली।
इसके बाद रोहतास पुलिस की टीम ने वाराणसी में छापेमारी की और तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में बलिया जिले के सातवार निवासी पुरुषोत्तम सिंह, रोहतास के करगहर निवासी अनिल कुमार और शिवसागर थाना क्षेत्र के कोनार गांव निवासी राजीव कुमार चौबे शामिल हैं। तीनों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
पूछताछ के दौरान पुलिस को यह जानकारी मिली है कि आरोपी लोगों को झांसा देकर उनके बैंक खातों की जानकारी हासिल करते थे या फिर ऐसे खातों का उपयोग करते थे जो उनके नियंत्रण में होते थे। इसके बाद वे इन खातों के जरिए ठगी की रकम को ट्रांसफर और निकालते थे, जिससे असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था। यह गिरोह डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीकों का भी इस्तेमाल कर रहा था, जिसमें लोगों को डराकर या भ्रमित कर पैसे ट्रांसफर कराए जाते थे।
एसपी रौशन कुमार ने बताया कि इस मामले में और भी लोगों की संलिप्तता की संभावना है और पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध के मामलों में तकनीकी साक्ष्य बेहद महत्वपूर्ण होते हैं और पुलिस इस दिशा में लगातार अपनी क्षमता बढ़ा रही है। उन्होंने आम लोगों से भी अपील की कि वे अपने बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन को लेकर सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या लिंक से दूर रहें।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर अपराधियों का नेटवर्क काफी बड़ा और संगठित होता है, जो अलग-अलग राज्यों में फैला होता है। ऐसे में एक राज्य में हुई ठगी का संबंध दूसरे राज्य से जुड़ना आम बात है। इस मामले में भी महाराष्ट्र में दर्ज केस का लिंक रोहतास और वाराणसी तक पहुंचा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि गिरोह अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय था।
इस कार्रवाई के बाद रोहतास जिले में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस की सक्रियता को लेकर लोगों में विश्वास बढ़ा है। स्थानीय लोगों ने पुलिस की इस सफलता की सराहना की है और उम्मीद जताई है कि आगे भी ऐसे अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और खुलासे हो सकते हैं। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और अन्य डिजिटल माध्यमों की जांच की जा रही है। इसके आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
कुल मिलाकर, यह मामला न केवल एक बड़ी साइबर ठगी का खुलासा है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे अपराधी तकनीक का दुरुपयोग कर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि लोग सतर्क रहें और किसी भी अनजान व्यक्ति या संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत पुलिस को सूचित करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

Post a Comment