सासाराम (रोहतास): निजी विद्यालयों से जुड़े शुल्क, कॉपी-किताब, ड्रेस (यूनिफॉर्म) और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। इसी कड़ी में Private Schools and Children Welfare Association (PSACWA) द्वारा आज एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही है, जिसमें एसोसिएशन अपना आधिकारिक पक्ष रखेगा।
यह प्रेस वार्ता रविवार, 12 अप्रैल 2026 को अपराह्न 11:00 बजे उमा ऑडिटोरियम, संत पॉल स्कूल में आयोजित होगी।
एसोसिएशन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बिहार सरकार द्वारा प्रकाशित “बिहार प्राइवेट स्कूल्स (फीस रेगुलेशन) एक्ट, 2019” के प्रावधानों के आलोक में हाल ही में जिला पदाधिकारी एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा जारी निर्देशों पर एसोसिएशन अपना विधिक एवं तथ्यात्मक पक्ष प्रस्तुत करेगा।
प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि यह अधिनियम एक विशेष कानून है, जो निजी विद्यालयों में शुल्क निर्धारण, शुल्क वृद्धि और उससे संबंधित विवादों के समाधान के लिए पूर्ण रूप से लागू है। इसके तहत Fee Regulation Committee का गठन किया गया है, जो शुल्क से जुड़े मामलों की जांच और निर्णय लेने के लिए अधिकृत है।
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की शिकायत, जांच या शुल्क विवाद का निपटारा इसी वैधानिक समिति के माध्यम से किया जाना चाहिए। साथ ही विद्यालयों की वित्तीय और प्रशासनिक संरचना को ध्यान में रखते हुए संतुलित नियामक व्यवस्था लागू करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।
अधिनियम के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि राज्य सरकार को 7% तक शुल्क वृद्धि दर की समय-समय पर समीक्षा करने का अधिकार है, जबकि 7% से अधिक की वृद्धि केवल समिति की जांच और स्वीकृति के अधीन ही संभव है।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉपी-किताब, यूनिफॉर्म (ड्रेस), स्कूल काउंटर व्यवस्था, अभिभावकों पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव तथा अन्य प्रशासनिक निर्देशों पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी।
इस प्रेस विज्ञप्ति के जारीकर्ता डॉ. एस.पी. वर्मा (राष्ट्रीय संयुक्त सचिव, PSACWA) ने कहा कि एसोसिएशन शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है तथा सभी पक्षों की बात को सामने रखने का प्रयास करेगा।
शिक्षा जगत से जुड़े इस मुद्दे को लेकर आयोजित यह प्रेस वार्ता काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसमें लिए गए निर्णय और रखे गए विचार भविष्य में निजी विद्यालयों की नीतियों और कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं।


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