संवाददाता: अनिल रोहतासी l जयपुर: राजस्थान में बहुप्रतीक्षित जनगणना प्रक्रिया को लेकर सरकार ने विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है। राज्य में जनगणना का पहला चरण 16 मई 2026 से शुरू होगा, जो आधुनिक तकनीक और पारंपरिक सर्वे प्रणाली के समन्वय के साथ संचालित किया जाएगा।
इस बार जनगणना को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए इसे तीन चरणों में पूरा किया जाएगा।
पहला चरण: सेल्फ सेंसस (1 मई से 15 मई 2026)
इस चरण में आम नागरिकों को स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन माध्यम से दर्ज करने का मौका दिया जाएगा। सरकार द्वारा इसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है, जहां लोग घर बैठे अपने परिवार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जैसे—परिवार के सदस्यों की संख्या, शिक्षा, रोजगार, आय और अन्य सामाजिक-आर्थिक विवरण भर सकेंगे।
इस पहल का उद्देश्य लोगों की भागीदारी बढ़ाना और डेटा संग्रहण को तेज व आसान बनाना है।
दूसरा चरण: घर-घर सत्यापन (16 मई 2026 से)
सेल्फ सेंसस के बाद सरकारी कर्मचारी और नियुक्त गणनाकर्मी घर-घर जाकर दर्ज की गई जानकारी का सत्यापन करेंगे। इस दौरान जिन लोगों ने ऑनलाइन जानकारी नहीं भरी होगी, उनका डेटा भी मौके पर ही एकत्र किया जाएगा।
प्रशासन ने इसके लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर्मचारियों की तैनाती की योजना बनाई है, ताकि हर घर तक पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
तीसरा चरण: व्यक्तिगत गणना (फरवरी 2027)
अंतिम चरण में प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत गणना की जाएगी, जिससे राज्य की जनसंख्या का सटीक और अद्यतन रिकॉर्ड तैयार किया जा सके। यह चरण पूरे अभियान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
क्यों है यह जनगणना महत्वपूर्ण?
जनगणना केवल जनसंख्या गिनने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह सरकार के लिए भविष्य की नीतियां बनाने का आधार होती है।
- शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आवास योजनाओं की योजना इसी डेटा पर निर्भर करती है
- ग्रामीण और शहरी विकास के लिए सटीक आंकड़े मिलते हैं
- आर्थिक और सामाजिक स्थिति का सही आकलन होता है
सरकार की अपील
राज्य सरकार ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे जनगणना प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और सही व पूरी जानकारी उपलब्ध कराएं। गलत या अधूरी जानकारी भविष्य की योजनाओं को प्रभावित कर सकती है।
निष्कर्ष
राजस्थान में शुरू होने जा रही यह जनगणना न केवल प्रशासनिक दृष्टि से अहम है, बल्कि यह राज्य के समग्र विकास की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। डिजिटल और फील्ड सर्वे के इस संयोजन से उम्मीद है कि इस बार जनगणना पहले से अधिक सटीक और प्रभावी होगी।

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