नई दिल्ली | India A To Z News
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा 12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणामों के बाद पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) के लिए शुरू किए गए ऑनलाइन पोर्टल पर साइबर हमले की बड़ी कोशिश सामने आई है। बोर्ड के अनुसार 2 जून को जैसे ही री-इवैल्यूएशन पोर्टल खोला गया, उसके मात्र दो मिनट के भीतर 15 लाख से अधिक संदिग्ध हिट दर्ज की गईं। हालांकि CBSE का दावा है कि उसका साइबर सुरक्षा तंत्र पूरी तरह सक्रिय था और हमले की इन कोशिशों का छात्रों की सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ा।
CBSE की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि बोर्ड के सर्वर और पोर्टल को अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली से लैस किया गया है। इसी कारण भारी ट्रैफिक और संदिग्ध साइबर गतिविधियों के बावजूद पोर्टल सामान्य रूप से कार्य करता रहा और छात्रों को आवेदन करने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई।
6 जून तक कर सकते हैं आवेदन
CBSE ने 12वीं कक्षा के उन छात्रों के लिए पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू की है जो अपने परीक्षा परिणाम से संतुष्ट नहीं हैं और उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच करवाना चाहते हैं। बोर्ड के अनुसार छात्र 6 जून तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया हर वर्ष हजारों छात्रों के लिए महत्वपूर्ण होती है क्योंकि कई बार उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में तकनीकी या मानवीय त्रुटियां सामने आती हैं। ऐसे में छात्र अपने प्राप्त अंकों की दोबारा समीक्षा का अवसर प्राप्त करते हैं।
दोपहर 3 बजे तक 16 हजार से अधिक आवेदन
बोर्ड की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार 2 जून को दोपहर 3 बजे तक 16 हजार से अधिक छात्रों ने सफलतापूर्वक पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन जमा कर दिया था। यह संख्या लगातार बढ़ रही है।
CBSE ने बताया कि पोर्टल एक समय में 8 हजार से अधिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं को संभालने की क्षमता रखता है। भारी ट्रैफिक के बावजूद सिस्टम सुचारू रूप से संचालित होता रहा।
बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि छात्रों और अभिभावकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी है।
क्या था साइबर अटैक का मामला?
जानकारी के अनुसार पोर्टल शुरू होते ही बड़ी संख्या में संदिग्ध डिजिटल रिक्वेस्ट सर्वर तक पहुंचीं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डिस्ट्रीब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस (DDoS) जैसे हमले का प्रयास हो सकता है, जिसमें किसी वेबसाइट या पोर्टल पर अचानक अत्यधिक ट्रैफिक भेजकर उसे ठप करने की कोशिश की जाती है।
हालांकि CBSE ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि हमला किस प्रकार का था और इसके पीछे कौन लोग थे। लेकिन बोर्ड ने यह जरूर कहा है कि सुरक्षा प्रणाली ने इन सभी प्रयासों को सफल होने से पहले ही रोक दिया।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार देश की बड़ी शैक्षणिक संस्थाओं के पोर्टल अक्सर साइबर अपराधियों के निशाने पर रहते हैं क्योंकि यहां लाखों छात्रों का डेटा और महत्वपूर्ण सूचनाएं मौजूद होती हैं।
OSM प्रणाली को लेकर बढ़ी चिंता
री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर साइबर अटैक की खबर ऐसे समय सामने आई है जब CBSE की ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली पहले से ही विवादों में है।
OSM यानी ऑन स्क्रीन मार्किंग एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है, जिसमें परीक्षकों को उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाती है और मूल्यांकन कंप्यूटर स्क्रीन पर किया जाता है।
इस प्रणाली को मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया था। लेकिन हाल के दिनों में इसमें कई तकनीकी खामियों और डेटा सुरक्षा संबंधी सवालों ने बोर्ड की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
शिक्षा मंत्रालय ने शुरू की उच्च स्तरीय जांच
OSM प्रणाली में सामने आई शिकायतों और पुनर्मूल्यांकन पोर्टल को लेकर उठे सवालों के बाद शिक्षा मंत्रालय ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है।
सूत्रों के अनुसार मंत्रालय ने मूल्यांकन प्रक्रिया, डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था और डेटा प्रबंधन प्रणाली से संबंधित सभी दस्तावेज तलब किए हैं।
जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी स्तर पर तकनीकी लापरवाही तो नहीं हुई और क्या छात्रों के डेटा की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाए गए थे।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी या लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उत्तर पुस्तिकाओं का डेटा सार्वजनिक होने के दावे
इस पूरे विवाद को उस समय और बल मिला जब हाल ही में कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि 12वीं बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं से संबंधित डेटा सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध था।
CBSE ने इन दावों को पूरी तरह खारिज नहीं किया बल्कि स्वीकार किया कि कुछ सुरक्षा कमजोरियों की पहचान की गई थी। बोर्ड ने कहा कि इन कमियों को तत्काल प्रभाव से दूर कर दिया गया है और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों इसके लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जा रहे हैं।
डेटा सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं या व्यक्तिगत जानकारी तक अनधिकृत पहुंच संभव हुई होगी तो यह बेहद गंभीर मामला माना जाएगा।
निजी कंपनी को दिए गए ठेके की भी जांच
शिक्षा मंत्रालय ने OSM मूल्यांकन प्रणाली से जुड़ी निजी कंपनी को दिए गए ठेके की प्रक्रिया की भी जांच शुरू कर दी है।
मंत्रालय ने निविदा प्रक्रिया, तकनीकी पात्रता, चयन मानदंड और वित्तीय नियमों के अनुपालन से जुड़े सभी दस्तावेजों की समीक्षा करने का आदेश दिया है।
सूत्रों के अनुसार यह जांच इस बात पर केंद्रित होगी कि मूल्यांकन प्रणाली विकसित करने वाली एजेंसी का चयन पूरी पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के तहत किया गया था या नहीं।
यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित एजेंसियों पर कार्रवाई की जा सकती है।
छात्रों को राहत देने की तैयारी
शिक्षा मंत्रालय इस बात को लेकर भी गंभीर है कि तकनीकी गड़बड़ियों या मूल्यांकन संबंधी त्रुटियों का असर छात्रों के भविष्य पर न पड़े।
सूत्रों के अनुसार मंत्रालय प्रभावित छात्रों को राहत देने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। इनमें पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज करना, परिणाम संशोधन की प्रक्रिया को सरल बनाना और कॉलेज प्रवेश एवं काउंसिलिंग की समय-सीमा बढ़ाना शामिल हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छात्रों के अंकों में संशोधन होता है तो उन्हें उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के दौरान किसी प्रकार का नुकसान नहीं होना चाहिए।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
CBSE की मूल्यांकन प्रणाली में सामने आई गड़बड़ियों को लेकर विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय पर सवाल उठा रहे हैं।
विपक्ष का आरोप है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली लागू करने से पहले पर्याप्त तैयारी नहीं की गई और इससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
कुछ विपक्षी नेताओं ने शिक्षा मंत्री से जवाब मांगते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी की है।
हालांकि सरकार का कहना है कि सभी शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
संसदीय समिति करेगी सवाल-जवाब
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा मंत्रालय से संबंधित संसदीय समिति ने CBSE और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया है।
मंगलवार को होने वाली बैठक में CBSE अध्यक्ष से ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली, साइबर सुरक्षा व्यवस्था, डेटा सुरक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सवाल पूछे जाएंगे।
इसके अलावा समिति छात्रों के हितों की रक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों की भी समीक्षा करेगी। बैठक में नई शिक्षा नीति के तहत नौवीं और दसवीं कक्षाओं में लागू किए गए त्रिभाषा फॉर्मूले पर भी चर्चा होने की संभावना है।
आगे क्या?
CBSE ने छात्रों और अभिभावकों को आश्वस्त किया है कि री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित है और आवेदन निर्धारित समय तक जारी रहेंगे। वहीं शिक्षा मंत्रालय की जांच रिपोर्ट आने के बाद कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक साइबर हमले का नहीं बल्कि देश की सबसे बड़ी शैक्षणिक मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता और डेटा सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। ऐसे में जांच के निष्कर्ष भविष्य में CBSE की कार्यप्रणाली और डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था में बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं।
रिपोर्ट:India A To Z News डेस्क
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