रिपोर्ट: India A To Z News जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ जारी कार्रवाई के बीच सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ी सफलता मिली है। प्रतिबंधित आतंकी संगठन अल-बद्र (Al Badr) से जुड़ा कुख्यात आतंकी अरजमंद गुलजार उर्फ हमजा बुरहान पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मारा गया है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वह लंबे समय से भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों को संचालित कर रहा था और वर्ष 2019 में हुए पुलवामा आतंकी हमले के प्रमुख साजिशकर्ताओं में शामिल माना जाता था।
कौन था आतंकी हमजा बुरहान?
मिली जानकारी के अनुसार, आतंकी हमजा बुरहान उर्फ अरजमंद गुलजार जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रतनीपुरा (खरबतपोरा) इलाके का रहने वाला था। उसके पिता का नाम अहमद डार बताया जाता है। शुरुआती दौर में वह सामान्य जीवन जी रहा था, लेकिन बाद में कट्टरपंथी सोच के प्रभाव में आकर आतंकवाद की राह पर चल पड़ा।
बताया जाता है कि वह वैध यात्रा दस्तावेजों के जरिए भारत से पाकिस्तान गया था। पाकिस्तान पहुंचने के बाद उसने प्रतिबंधित आतंकी संगठन अल-बद्र ज्वाइन कर लिया। कट्टर विचारधारा और आतंकी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण उसने जल्द ही संगठन में अहम स्थान बना लिया और उसे कमांडर की जिम्मेदारी सौंप दी गई।
पाकिस्तान और PoK से चला रहा था आतंकी नेटवर्क
खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, हमजा बुरहान पिछले लगभग सात वर्षों से पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में रह रहा था। वह वहीं से बैठकर जम्मू-कश्मीर में आतंकियों को निर्देश देता था और नए युवाओं की भर्ती, हथियारों की सप्लाई तथा आतंकी मॉड्यूल तैयार करने में सक्रिय भूमिका निभाता था।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि वह सोशल मीडिया और ओवरग्राउंड नेटवर्क (OGWs) के जरिए घाटी में आतंकवादी गतिविधियों को मजबूत करने का प्रयास करता था। कई बार उसका नाम सीमा पार से आतंकियों की घुसपैठ कराने की साजिशों में भी सामने आया था।
पुलवामा हमले में थी मुख्य भूमिका
भारत के इतिहास के सबसे बड़े आतंकी हमलों में शामिल पुलवामा हमला, 14 फरवरी 2019 को हुआ था। इस हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के काफिले को निशाना बनाया गया था। आत्मघाती हमले में 40 से अधिक जवान शहीद हो गए थे, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, पुलवामा हमले की साजिश को अंजाम देने में हमजा बुरहान की अहम भूमिका थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, हमले के लिए आवश्यक विस्फोटक सामग्री और हथियार जुटाने, उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने तथा ओवरग्राउंड वर्करों (OGWs) के नेटवर्क को सक्रिय करने की जिम्मेदारी उसी के पास थी।
बताया जाता है कि उसने हमले के लिए स्थानीय मॉड्यूल तैयार करने में भी सहयोग किया था। हालांकि, वह सीधे भारत में मौजूद नहीं था, लेकिन पाकिस्तान और PoK से बैठकर पूरी साजिश का संचालन कर रहा था।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता
हमजा बुरहान की मौत को भारतीय सुरक्षा एजेंसियां एक महत्वपूर्ण सफलता मान रही हैं। लंबे समय से वह भारत विरोधी गतिविधियों में सक्रिय था और कई आतंकी मामलों में उसका नाम सामने आया था। उसकी मौत से कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को बड़ा झटका लग सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आतंकियों के खत्म होने से सीमा पार बैठे आतंकी संगठनों की रणनीति कमजोर पड़ती है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां अब भी सतर्क हैं क्योंकि आतंकवादी संगठन नए मॉड्यूल तैयार करने की कोशिश कर सकते हैं।
आतंकवाद के खिलाफ जारी है अभियान
जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों ने आतंकवाद के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया है। कई कुख्यात आतंकियों का सफाया किया गया है और आतंकी फंडिंग व नेटवर्क पर भी लगातार कार्रवाई हो रही है। केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियां लगातार यह दावा करती रही हैं कि घाटी में आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए अभियान जारी रहेगा।
हमजा बुरहान की मौत ऐसे समय में हुई है जब भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति को और अधिक सख्त बना चुका है। आने वाले समय में भी सीमा पार से आतंक फैलाने वाले नेटवर्क पर कार्रवाई तेज रहने की संभावना जताई जा रही है।
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