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सड़क हादसों में घायल व्यक्ति को सिर्फ ₹1 में हेलीकॉप्टर एयर एंबुलेंस सुविधा देने की तैयारी, 2027 में यमुना एक्सप्रेसवे पर शुरू हो सकता है ऐतिहासिक मिशन


 नई दिल्ली/उत्तर प्रदेश | India A To Z News भारत में सड़क हादसों में हर वर्ष लाखों लोग अपनी जान गंवा देते हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण हजारों परिवार अपनों को खो देते हैं। ऐसे में एक ऐसी योजना सामने आई है, जो यदि जमीन पर उतरती है तो देश की सड़क सुरक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव ला सकती है। सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को सिर्फ एक रुपये में हेलीकॉप्टर एयर एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना की पहल “हेलमेट मैन ऑफ इंडिया” राघवेंद्र कुमार द्वारा की जा रही है, जो पिछले 12 वर्षों से सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में लगातार काम कर रहे हैं।

राघवेंद्र कुमार वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश के यमुना एक्सप्रेसवे पर तीन हेलीकॉप्टर एयर एंबुलेंस के साथ एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी में हैं। इस मिशन को उन्होंने “संजीवनी बूटी मिशन” नाम दिया है। इस परियोजना का उद्देश्य सड़क हादसे में घायल लोगों को गोल्डन आवर के भीतर अस्पताल पहुंचाना है, ताकि उनकी जान बचाई जा सके।

सड़क दुर्घटनाओं के खिलाफ लंबे समय से अभियान चला रहे राघवेंद्र कुमार का कहना है कि भारत में हर साल लाखों सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और इनमें समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण हजारों लोगों की मौत हो जाती है। यदि गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को दुर्घटना के पहले एक घंटे यानी गोल्डन आवर के भीतर अस्पताल पहुंचा दिया जाए, तो बड़ी संख्या में लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है।

हाल ही में इस मिशन को लेकर एयर इंडिया टाटा के गुरुग्राम स्थित मुख्यालय वाटिका में सड़क सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में एयर इंडिया के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान एयर इंडिया के CEO कैंपबेल विल्सन ने हेलमेट मैन ऑफ इंडिया राघवेंद्र कुमार को सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया। बैठक के दौरान राघवेंद्र कुमार ने अपने विजन को अधिकारियों के सामने विस्तार से रखा और एक अनोखा “H3 फॉर्मूला” प्रस्तुत किया।

राघवेंद्र कुमार के अनुसार H3 का मतलब है – हेलीकॉप्टर, हाईवे और हॉस्पिटल। उनका मानना है कि यदि इन तीनों को एक साथ व्यवस्थित तरीके से जोड़ दिया जाए, तो सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को बेहद कम समय में बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जा सकता है। उन्होंने इस मिशन का ब्लूप्रिंट एक हेलमेट के ऊपर डिजाइन कर अधिकारियों को दिखाया, जिसे काफी सराहना मिली।

योजना के तहत यमुना एक्सप्रेसवे पर शुरुआती चरण में तीन हेलीकॉप्टर एयर एंबुलेंस तैनात की जाएंगी। इन हेलीकॉप्टरों को सड़क हादसे की सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर भेजा जाएगा, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर मरीज को नजदीकी बड़े अस्पताल तक पहुंचाया जाएगा। बताया जा रहा है कि दिल्ली-एनसीआर और यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास स्थित कई बड़े अस्पताल अपने यहां हेलीपैड बनाने की तैयारी में जुट गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर हेलीकॉप्टर सीधे मरीज को अस्पताल तक पहुंचा सके।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना की लागत को लेकर भी विस्तृत योजना तैयार की गई है। जानकारी के मुताबिक, एक हेलीकॉप्टर का एक साल का लीज खर्च लगभग 7 करोड़ रुपये है, जिसमें लगभग 500 घंटे की उड़ान, ईंधन और स्टाफ का खर्च शामिल है। तीन हेलीकॉप्टरों का कुल वार्षिक खर्च करीब 21 करोड़ रुपये होगा।

राघवेंद्र कुमार का कहना है कि इस योजना को आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाले बिना भी सफल बनाया जा सकता है। उनके मुताबिक, यदि यमुना एक्सप्रेसवे से गुजरने वाली प्रत्येक गाड़ी से सिर्फ ₹1 सेवा शुल्क लिया जाए, तो हर महीने लगभग 3 करोड़ रुपये की राशि जुटाई जा सकती है। इस हिसाब से साल भर में करीब 36 करोड़ रुपये एकत्रित हो सकते हैं। इसमें से हेलीकॉप्टर संचालन का खर्च निकालने के बाद बची राशि का उपयोग एक्सप्रेसवे और सर्विस रोड पर कार एंबुलेंस बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में किया जा सकता है।

सूत्रों के अनुसार, इस योजना में भारत की कुछ निजी कंपनियों के अलावा कई विदेशी कंपनियों ने भी रुचि दिखाई है और प्रस्ताव भेजे हैं। वहीं, इस मिशन को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के साथ भी बातचीत की तैयारी चल रही है। जानकारी के मुताबिक, बहुत जल्द हेलमेट मैन ऑफ इंडिया राघवेंद्र कुमार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर इस परियोजना का विस्तृत खाका साझा कर सकते हैं।

इस मिशन में भारतीय सेना भी तकनीकी और रणनीतिक स्तर पर सहयोग कर रही है। गौरतलब है कि यमुना एक्सप्रेसवे पर पहले भी फाइटर प्लेन की इमरजेंसी लैंडिंग और अभ्यास कराया जा चुका है, जिससे यह क्षेत्र आपातकालीन सेवाओं के लिए तकनीकी रूप से उपयुक्त माना जा रहा है।

यमुना एक्सप्रेसवे देश के उन हाईवे में शामिल है जहां सड़क हादसों की संख्या काफी अधिक रही है। तेज रफ्तार और लंबी दूरी के कारण यहां हर साल बड़ी संख्या में लोग दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं। कई मामलों में समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने के कारण लोगों की मौत हो जाती है। इनमें आम नागरिकों के अलावा पुलिसकर्मी और सेना के जवान भी शामिल रहे हैं।

भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार, यदि सड़क हादसे में घायल लोगों को गोल्डन आवर के भीतर चिकित्सा सुविधा मिल जाए, तो हर साल कम से कम 60 हजार लोगों की जान बचाई जा सकती है। देश में हर वर्ष करीब 2 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। सरकार का यह भी मानना है कि एक व्यक्ति की सड़क दुर्घटना में मौत से देश को लगभग 90 लाख रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान होता है।

राघवेंद्र कुमार की यह लड़ाई सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि एक निजी दर्द से शुरू हुई थी। वर्ष 2014 में नोएडा एक्सप्रेसवे पर उनके रूम पार्टनर और करीबी मित्र कृष्णा की हेलमेट नहीं पहनने के कारण सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया और तभी उन्होंने सड़क सुरक्षा के लिए जीवन समर्पित करने का निर्णय लिया।

पिछले 12 वर्षों में वे भारत के 22 राज्यों में जाकर 75 हजार से अधिक हेलमेट बांट चुके हैं। उनका उद्देश्य लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करना और दुर्घटनाओं को कम करना है। वे लगातार सेना, पुलिस और विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर सड़क सुरक्षा अभियान चला रहे हैं।

राघवेंद्र कुमार कहते हैं, “भारत सड़क दुर्घटनाओं का गुलाम बन चुका है। जब तक हम इस समस्या पर विजय नहीं पाएंगे, तब तक विकसित भारत का सपना अधूरा रहेगा। हमारा लक्ष्य हर भारतीय की जिंदगी बचाना है।”

यदि यह योजना सफल होती है, तो आने वाले समय में भारत में सड़क दुर्घटना के बाद इलाज की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है और आम आदमी के लिए हेलीकॉप्टर एयर एंबुलेंस किसी सपने की बजाय एक सच्चाई बन सकती है।

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