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राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री Dilip Jaiswal की बड़ी कार्रवाई, एक साथ 14 सीओ पर गिरी गाज; विभाग में मचा हड़कंप

 पटना। बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की कार्यशैली को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बीच राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री Dilip Jaiswal ने सख्त रुख अपनाते हुए एक साथ 14 अंचल अधिकारियों (सीओ) पर कार्रवाई की है। मंत्री की इस कार्रवाई से पूरे विभाग में हड़कंप का माहौल है। इसे सरकार की प्रशासनिक सख्ती और जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, राज्य के विभिन्न जिलों से जमीन संबंधी मामलों के निपटारे में देरी, दाखिल-खारिज लंबित रहने, दाखिल-खारिज में अनियमितता, भूमि विवादों के समाधान में लापरवाही तथा आम जनता की शिकायतों की अनदेखी जैसी शिकायतें लगातार विभाग को मिल रही थीं। इन शिकायतों की समीक्षा के बाद मंत्री ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का निर्णय लिया।

बताया जा रहा है कि विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान कई अंचलों की रिपोर्ट संतोषजनक नहीं पाई गई। बड़ी संख्या में लंबित मामलों और शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मंत्री ने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। इसके बाद 14 सीओ पर एक साथ कार्रवाई की गई। विभागीय स्तर पर इस कार्रवाई को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं।

मंत्री Dilip Jaiswal ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जमीन से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि आम लोगों को समय पर न्याय और सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। यदि कोई अधिकारी अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरतता है या जनता की समस्याओं को नजरअंदाज करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय है।


राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग राज्य सरकार का बेहद महत्वपूर्ण विभाग माना जाता है। जमीन विवाद, दाखिल-खारिज, परिमार्जन, लगान रसीद, ऑनलाइन दाखिल-खारिज और भू-अभिलेख सुधार जैसे अनेक काम सीधे इसी विभाग के अंतर्गत आते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग रोजाना इन सेवाओं के लिए अंचल कार्यालयों का चक्कर लगाते हैं। ऐसे में अधिकारियों की लापरवाही लोगों की परेशानी बढ़ा देती है।

पिछले कुछ महीनों में कई जिलों से शिकायतें सामने आई थीं कि लोगों के दाखिल-खारिज के आवेदन महीनों से लंबित पड़े हैं। कई मामलों में जमीन मापी और सीमांकन का काम भी समय पर नहीं हो पा रहा था। कुछ स्थानों पर राजस्व कर्मचारियों और अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे थे। सरकार ने इन्हीं शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए यह बड़ा कदम उठाया है।

राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि मंत्री की यह कार्रवाई विभागीय अधिकारियों के लिए सीधा संदेश है कि अब काम में ढिलाई नहीं चलेगी। इससे पूरे विभाग में जवाबदेही बढ़ेगी और आम लोगों के लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आ सकती है।

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जनता से जुड़े मामलों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। खासकर दाखिल-खारिज, भूमि विवाद और ऑनलाइन सेवाओं से संबंधित मामलों में देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार पारदर्शी प्रशासन देने के लिए प्रतिबद्ध है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

इस कार्रवाई के बाद विभाग के अन्य अधिकारियों में भी सतर्कता बढ़ गई है। कई जिलों में लंबित मामलों की समीक्षा शुरू कर दी गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में विभागीय कार्यों की निगरानी और तेज होगी। यदि किसी अन्य अधिकारी के खिलाफ भी गंभीर शिकायत मिलती है तो आगे और कार्रवाई हो सकती है।

सरकार के इस कदम से आम लोगों में उम्मीद जगी है कि अब भूमि से जुड़े मामलों के निपटारे में तेजी आएगी। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग जमीन विवाद और दाखिल-खारिज की समस्याओं से जूझते रहे हैं। ऐसे में मंत्री की इस कार्रवाई को जनता राहत के तौर पर देख रही है।

फिलहाल 14 सीओ पर हुई कार्रवाई पूरे राज्य में चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रशासनिक गलियारों में इसे एक बड़ा संदेश माना जा रहा है कि सरकार अब लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्ती के मूड में है। आने वाले समय में इसका असर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर साफ दिखाई दे सकता है।

रिपोर्ट — इंडिया A टू Z न्यूज़

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