इस फैसले ने देशभर के करीब 22 लाख छात्रों को प्रभावित किया है, जिन्होंने मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने के लिए इस परीक्षा में भाग लिया था। लाखों छात्रों की महीनों की मेहनत और तैयारी के बीच परीक्षा रद्द होने से छात्रों और अभिभावकों में गहरी नाराजगी और चिंता का माहौल है।
पेपर लीक की खबरों के बाद बढ़ा विवाद
जानकारी के अनुसार, राजस्थान में 10 मई को कथित पेपर लीक से जुड़ी रिपोर्टें सामने आई थीं। आरोप लगाए गए कि परीक्षा से पहले कुछ व्हाट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप्स पर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया था। इसके बाद पूरे देश में इस परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे। सोशल मीडिया पर छात्रों ने #NEETPaperLeak और #ReNEET जैसे अभियान चलाकर जांच और कार्रवाई की मांग की।
लगातार बढ़ते दबाव और विरोध के बीच आखिरकार एनटीए ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। एजेंसी का कहना है कि निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है ताकि सभी छात्रों को समान अवसर मिल सके।
दोबारा होगी परीक्षा, नहीं लगेगी अतिरिक्त फीस
एनटीए ने साफ किया है कि परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी और इसके लिए छात्रों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। जिन अभ्यर्थियों ने पहले आवेदन किया था, उनका पंजीकरण मान्य रहेगा। हालांकि, दोबारा परीक्षा की तारीख को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
छात्रों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि दोबारा परीक्षा होने से उनका मानसिक दबाव और बढ़ेगा। कई छात्र महीनों से तैयारी कर रहे थे और परीक्षा के बाद राहत महसूस कर रहे थे, लेकिन अब उन्हें फिर से पढ़ाई के तनाव से गुजरना होगा।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
नीट यूजी परीक्षा रद्द होने के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार और एनटीए पर गंभीर सवाल उठाए हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि यह युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि:
“यह अब कोई परीक्षा नहीं रही। NEET अब एक नीलामी बन गई है। मेहनत करने वाले छात्रों के सपनों को बेचा जा रहा है। युवाओं के भविष्य के साथ यह अपराध है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होना सरकार की विफलता को दर्शाता है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि छात्रों की मेहनत और भरोसे के साथ बार-बार अन्याय हो रहा है।
दिल्ली में छात्रों का विरोध प्रदर्शन
नीट परीक्षा रद्द होने के बाद छात्र संगठन NSUI ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतर आए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। छात्रों का कहना था कि बार-बार पेपर लीक होने से उनकी मेहनत बर्बाद हो रही है और मानसिक तनाव बढ़ रहा है।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा:
“पूरे देश के विद्यार्थी सड़कों पर हैं। छात्र पूछ रहे हैं कि सरकार कहां है? जिन बच्चों ने दिन-रात मेहनत की, उनके भविष्य को पांच-पांच हजार रुपये में व्हाट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप में बेच दिया गया।”
उन्होंने मांग की कि पेपर लीक में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाए।
छात्रों में गुस्सा और निराशा
नीट परीक्षा रद्द होने की खबर सामने आते ही देशभर के छात्रों में गुस्सा और निराशा देखने को मिली। कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा साझा की। कुछ छात्रों का कहना है कि उन्होंने एक साल या उससे अधिक समय तक तैयारी की थी और परीक्षा के बाद वे परिणाम का इंतजार कर रहे थे, लेकिन अब उन्हें फिर से उसी प्रक्रिया से गुजरना होगा।
अभिभावकों ने भी चिंता जताई है कि परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने से बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि सरकार को ऐसी एजेंसियों की जवाबदेही तय करनी चाहिए ताकि छात्रों के करियर के साथ खिलवाड़ न हो।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब किसी राष्ट्रीय परीक्षा को लेकर पेपर लीक का विवाद सामने आया हो। इससे पहले भी कई प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और लीक के आरोप लगे हैं। ऐसे मामलों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और संगठित गिरोहों के जरिए पेपर लीक की घटनाएं बढ़ी हैं, जिनसे निपटने के लिए तकनीकी निगरानी और सख्त कानून की जरूरत है।
सरकार और एनटीए पर बढ़ा दबाव
नीट यूजी 2026 रद्द होने के बाद केंद्र सरकार और एनटीए पर दबाव बढ़ गया है कि वे पारदर्शी जांच कर दोषियों को सजा दें। साथ ही लाखों छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द नई परीक्षा तिथि घोषित करें।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि दोबारा परीक्षा कब होगी और क्या इस बार निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से परीक्षा आयोजित की जा सकेगी। देशभर के छात्र उम्मीद कर रहे हैं कि उनके भविष्य के साथ दोबारा किसी तरह का खिलवाड़ नहीं होगा।
फिलहाल, 22 लाख छात्रों का इंतजार बढ़ गया है और पूरा देश इस बड़े शिक्षा विवाद पर नजर बनाए हुए है।
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