सासाराम | रिपोर्ट: टिपु सुल्तान
गर्मी की शुरुआत के साथ ही सोन नदी के तटीय इलाकों में भीषण पेयजल संकट गहराने लगा है। नदी किनारे बसे सैकड़ों गांवों में जलस्तर तेजी से नीचे खिसकने के कारण लोगों को पीने के पानी के लिए भी जूझना पड़ रहा है। डेहरी, डालमियानगर, न्यू सिधौली से लेकर नासरीगंज तक के ग्रामीण इस समस्या से बुरी तरह प्रभावित हैं।
अवैध खनन बना बड़ी वजह
ग्रामीणों का आरोप है कि सोन नदी में हो रहे अवैध बालू खनन के कारण यह संकट उत्पन्न हुआ है। लगातार खनन की वजह से जलस्तर काफी नीचे चला गया है। हालात यह हैं कि गांवों में लगे चापाकल, कुएं और मोटर पंप सूखने लगे हैं।
खेती भी हुई प्रभावित
पानी की कमी का असर अब खेती पर भी दिखने लगा है। सोन नदी के किनारे बड़ी संख्या में किसान सब्जियों की खेती करते हैं, जो बोरिंग के पानी पर निर्भर है। लेकिन जलस्तर गिरने से सिंचाई ठप हो गई है, जिससे फसलें सूखने लगी हैं और किसानों की चिंता बढ़ गई है।
धारा मोड़ने का आरोप
ग्रामीणों ने बताया कि बालू माफियाओं ने अवैध खनन के लिए नदी में बांध बनाकर उसकी धारा को बदल दिया है। पहले जहां 30–40 फीट पर पानी मिल जाता था, अब 70–80 फीट की खुदाई के बाद भी पानी नहीं मिल रहा है।
नल-जल योजना भी फेल
सरकारी नल-जल योजना भी ग्रामीणों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही है। लोगों का कहना है कि पानी की सप्लाई अनियमित है और कई-कई दिनों तक पानी नहीं आता, जिससे खासकर मजदूर वर्ग को भारी परेशानी होती है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और खनन विभाग से अवैध खनन पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि नदी में बनाए गए बांध को हटाकर सोन नदी की प्राकृतिक धारा को बहाल किया जाए, ताकि जलस्तर सामान्य हो सके और लोगों को राहत मिल सके।
फिलहाल, हालात गंभीर बने हुए हैं और यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में जल संकट और विकराल रूप ले सकता है।

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