पटना: बिहार की राजनीति में रविवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। जन सुराज पार्टी ने अपने संस्थापक प्रशांत किशोर को पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से होने वाले उपचुनाव का उम्मीदवार घोषित कर दिया। इसके साथ ही प्रशांत किशोर पहली बार किसी चुनाव में बतौर प्रत्याशी मैदान में उतरेंगे।
बांकीपुर विधानसभा सीट भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद खाली हुई थी। अब इस सीट पर 30 जुलाई को उपचुनाव होगा, जबकि मतगणना 3 अगस्त को होगी।
जन सुराज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने कोर कमेटी की बैठक के बाद प्रशांत किशोर के नाम की घोषणा की। इसके साथ ही लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लग गया। राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में देशभर में पहचान बनाने वाले प्रशांत किशोर अब पहली बार सीधे जनता से वोट मांगते नजर आएंगे।
उम्मीदवारी की घोषणा के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि यह सिर्फ एक उपचुनाव नहीं, बल्कि बिहार की वर्तमान सरकार के कामकाज पर जनता की राय जानने का अवसर है। उन्होंने कहा कि बांकीपुर के मतदाता शिक्षित और जागरूक हैं तथा उन्हें विश्वास है कि लोग विकास और बेहतर राजनीति के पक्ष में मतदान करेंगे।
प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि उनकी राजनीति सत्ता प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि बिहार में नई राजनीतिक संस्कृति स्थापित करने के उद्देश्य से है। उन्होंने दावा किया कि यदि जनता उन्हें विधानसभा भेजती है तो वे राज्य के मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे और सरकार को जवाबदेह बनाएंगे।
बांकीपुर सीट को भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। नितिन नवीन वर्ष 2010 से लगातार इस सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। उनके राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई और अब यहां उपचुनाव कराया जा रहा है। भाजपा ने अभी अपने उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन कई नामों पर चर्चा चल रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर का चुनाव लड़ना बिहार की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। अब तक वे चुनावी रणनीति बनाने के लिए जाने जाते थे, लेकिन इस बार उनकी अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता की परीक्षा होगी। यह उपचुनाव जन सुराज पार्टी के भविष्य और प्रशांत किशोर की राजनीतिक ताकत का भी बड़ा परीक्षण माना जा रहा है।
दूसरी ओर, भाजपा इस सीट को हर हाल में अपने कब्जे में बनाए रखना चाहेगी। ऐसे में बांकीपुर का मुकाबला बेहद दिलचस्प होने की संभावना है। यदि विपक्ष भी मजबूत उम्मीदवार उतारता है, तो चुनाव त्रिकोणीय रूप ले सकता है।
अब सभी की नजर नामांकन प्रक्रिया और चुनाव प्रचार पर टिकी है। 30 जुलाई को होने वाला मतदान और 3 अगस्त को आने वाला परिणाम यह तय करेगा कि क्या प्रशांत किशोर अपनी पहली चुनावी परीक्षा में सफलता हासिल कर पाते हैं या भाजपा अपना मजबूत गढ़ बचाने में कामयाब रहती है। फिलहाल, जन सुराज द्वारा प्रशांत किशोर को उम्मीदवार बनाए जाने के साथ ही बिहार की राजनीति में उपचुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है।
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