विशेष संवाददाता | इंडिया A To Z News
नई दिल्ली: भारत और जापान के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान उनका गर्मजोशी से स्वागत करते हुए उन्हें अपनी "छोटी बहन" बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की धरती पर जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री का स्वागत करना उनके लिए बेहद खुशी और सम्मान की बात है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सानाए ताकाइची की यह पहली भारत यात्रा है, लेकिन दोनों देशों के बीच विश्वास, मित्रता और रणनीतिक साझेदारी कई दशकों से लगातार मजबूत होती रही है। उन्होंने कहा कि भारत और जापान केवल अच्छे मित्र ही नहीं, बल्कि भविष्य की वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना करने वाले भरोसेमंद साझेदार भी हैं।
संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारत और जापान ने आर्थिक सुरक्षा (Economic Security) को लेकर एक व्यापक संयुक्त रोडमैप तैयार किया है। इस रोडमैप के तहत दोनों देश सेमीकंडक्टर निर्माण, क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मैटेरियल्स, डिजिटल इनोवेशन और वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे। इसका उद्देश्य दोनों देशों की तकनीकी क्षमता को बढ़ाना और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप उद्योगों को विकसित करना है।
प्रधानमंत्री ने सबसे बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि इंडिया-जापान बायोगैस इनिशिएटिव के तहत भारत में 1000 बायोगैस और ऑर्गेनिक खाद प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इन परियोजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा और जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यह पहल केंद्र सरकार की गोबरधन योजना को भी नई गति प्रदान करेगी, जिससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूती मिलेगी।
मोदी ने कहा कि भारत और जापान स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी अपनी साझेदारी को और आगे बढ़ाएंगे। दोनों देशों के बीच ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी निर्माण, न्यूक्लियर एनर्जी, नवीकरणीय ऊर्जा, रक्षा सहयोग, स्टार्टअप, अनुसंधान एवं नवाचार और उच्च तकनीक के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी आने वाले वर्षों में दोनों देशों की आर्थिक प्रगति और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नई दिशा देगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारत और जापान के साझा दृष्टिकोण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों लोकतांत्रिक देश क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री सहयोग और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए लगातार मिलकर काम करते रहेंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि अगले वर्ष भारत और जापान के बीच राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। इस ऐतिहासिक अवसर को दोनों देश विशेष कार्यक्रमों, सांस्कृतिक आयोजनों और विभिन्न साझेदारी परियोजनाओं के माध्यम से यादगार बनाएंगे। इससे दोनों देशों के नागरिकों के बीच भी आपसी संबंध और मजबूत होंगे।
जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने भी भारत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि भारत और जापान के रिश्ते केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, आपसी विश्वास और साझा विकास की सोच पर आधारित हैं। उन्होंने भारत में निवेश बढ़ाने, नई तकनीकों के विकास और औद्योगिक सहयोग को और मजबूत करने की इच्छा जताई।
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच हुए ये समझौते भारत के विनिर्माण क्षेत्र, कृषि, स्वच्छ ऊर्जा, तकनीकी विकास और रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। विशेष रूप से 1000 बायोगैस एवं ऑर्गेनिक खाद प्लांट लगाने की योजना ग्रामीण भारत में आर्थिक गतिविधियों को नई गति देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी।
भारत और जापान के बीच हुई यह उच्चस्तरीय वार्ता दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। आने वाले समय में इन समझौतों के प्रभाव से व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के संबंध और अधिक गहरे होने की उम्मीद है।
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