संवाददाता | शिवसागर/रोहतास जिले के शिवसागर थाना क्षेत्र अंतर्गत बम्हौर गांव में एक पुराने प्राथमिक विद्यालय भवन को कथित रूप से जेसीबी मशीन से तोड़े जाने, सरकारी सामग्री की अवैध बिक्री तथा विद्यालय की भूमि पर अतिक्रमण किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर काफी आक्रोश देखा जा रहा है। ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बम्हौर गांव स्थित पुराने प्राथमिक विद्यालय भवन को बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया और प्रशासनिक अनुमति के जेसीबी मशीन लगाकर तोड़ दिया गया। आरोप है कि भवन को ध्वस्त करने के बाद विद्यालय परिसर में मौजूद सरकारी सामग्री को भी अवैध रूप से बेचने का प्रयास किया गया। साथ ही विद्यालय की सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर निजी उपयोग में लाने की कोशिश की जा रही है।
इस पूरे मामले को लेकर गांव के वार्ड सदस्य सुनील सिंह बम्हौर ने गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने अपने लेटर पैड पर लिखित आवेदन देकर जिला प्रशासन को मामले से अवगत कराया है। आवेदन की प्रतिलिपि जिला समाहर्ता कार्यालय रोहतास, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय शिवसागर तथा अंचल कार्यालय शिवसागर को भेजी गई है। वार्ड सदस्य ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए ताकि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की पहचान हो सके और उन पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि विद्यालय भवन को तोड़ने के दौरान वहां मौजूद कई महत्वपूर्ण शैक्षणिक एवं प्रशासनिक दस्तावेजों को भी नुकसान पहुंचाया गया। विद्यालय से संबंधित रजिस्टर, पुराने अभिलेख एवं अन्य आवश्यक सामग्री क्षतिग्रस्त होने की आशंका जताई गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह केवल भवन तोड़ने का मामला नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और सरकारी अभिलेखों के संरक्षण से जुड़ा गंभीर विषय है।
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय की जमीन सार्वजनिक उपयोग के लिए होती है, जिसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और बच्चों को सुविधाएं उपलब्ध कराना होता है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति द्वारा सरकारी जमीन पर कब्जा करने अथवा अतिक्रमण की कोशिश की जाती है, तो यह कानून और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों के लिए चुनौती है। लोगों का कहना है कि सरकारी विद्यालयों की भूमि पर अतिक्रमण की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं होने के कारण ऐसे मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
मामले में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें राम सागर कुशवाहा, जिन्हें सरकारी शिक्षक बताया गया है, का नाम प्रमुख रूप से लिया जा रहा है। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर अभी तक किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। संबंधित पक्ष की ओर से भी कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में मामले की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विद्यालय भवन को तोड़ने की आवश्यकता थी, तो इसके लिए शिक्षा विभाग एवं संबंधित प्रशासनिक इकाइयों की अनुमति आवश्यक होती है। किसी भी सरकारी भवन को तोड़ने, स्थानांतरित करने अथवा उसकी सामग्री को हटाने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया होती है। बिना प्रशासनिक आदेश के इस तरह की कार्रवाई कई सवाल खड़े करती है।
गांव के कुछ लोगों ने आशंका जताई है कि विद्यालय की जमीन पर कब्जा करने की नीयत से भवन को क्षतिग्रस्त किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा रोकने के लिए प्रशासन को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उनका मानना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले समय में अन्य सरकारी परिसंपत्तियां भी अतिक्रमण का शिकार हो सकती हैं।
इस मामले को लेकर शिक्षा विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्यालय भवन एवं परिसंपत्तियों की निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होती है। ऐसे में यदि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया है, तो इसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
वार्ड सदस्य सुनील सिंह ने प्रशासन से मांग की है कि विद्यालय भूमि की तत्काल मापी कराकर अतिक्रमण मुक्त कराया जाए तथा भवन तोड़ने और सरकारी सामग्री के कथित दुरुपयोग की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालय किसी व्यक्ति विशेष की संपत्ति नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों की धरोहर हैं। इन्हें नुकसान पहुंचाना शिक्षा के अधिकार और सामाजिक हितों के विरुद्ध है।
फिलहाल मामला प्रशासनिक जांच के दायरे में आने की उम्मीद जताई जा रही है। ग्रामीणों की नजर अब जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई है। लोगों का कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होती है, तो इससे सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर एक मजबूत संदेश जाएगा।
(नोट: समाचार उपलब्ध आवेदन एवं स्थानीय स्तर पर प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी।)



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