बिहार डेस्क/रोहतास रिपोर्ट: अनिल रोहतासी | India A To Z News रोहतास जिले के करगहर प्रखंड क्षेत्र के सिरिसियां स्थित महादलित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-27 में बच्चों के साथ कथित रूप से हुए व्यवहार को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। आरोप है कि एक दिन पहले बच्चों के बीच पोशाक का वितरण किया गया और अगले ही दिन केंद्र पर पहुंचे महादलित बच्चों के कपड़े उतरवाकर उन्हें बाहर खड़ा कर दिया गया। घटना के बाद महादलित टोला में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और केंद्र के खिलाफ जमकर हंगामा हुआ।
मिली जानकारी के अनुसार सोमवार को आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-27 पर नामांकित बच्चों के बीच पोशाक वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। बच्चों के अभिभावकों से हस्ताक्षर लेकर पोशाक बांटे गए। लोगों को लगा कि बच्चों के लिए सरकार की ओर से चलाई जा रही योजना का लाभ उन्हें मिल रहा है और बच्चे खुश होकर नए कपड़े पहनकर घर लौटे। लेकिन अगले ही दिन मंगलवार को जो दृश्य सामने आया, उसने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि मंगलवार सुबह जब बच्चे पोशाक पहनकर आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचे तो सेविका द्वारा कुछ बच्चों के कपड़े उतरवा दिए गए और उन्हें केंद्र से बाहर कर दिया गया। बताया जा रहा है कि कपड़े उतरवाने के दौरान कई बच्चे घबरा गए और बच्चियां शर्म व संकोच के कारण रोने लगीं। बच्चों की आवाज सुनकर आसपास के लोग और परिजन आंगनबाड़ी केंद्र की ओर दौड़े। वहां पहुंचने पर उन्होंने बच्चों को बाहर खड़ा देखा, जिसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया।
घटना की सूचना पूरे महादलित टोला में तेजी से फैल गई। देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग केंद्र के बाहर जुट गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उनके बच्चों के साथ लगातार भेदभाव किया जाता है और उन्हें अन्य बच्चों के बराबर सुविधाएं नहीं मिलती हैं।
सिरिसियां महादलित टोला निवासी बिंदु मुसहर, राजू मुसहर, उपेंद्र मुसहर, सरपंच मुसहर, संतोष मुसहर, भीम मुसहर, कमलेश मुसहर, चंदन मुसहर, मौलवी मुसहर, टमाटर मुसहर, फिरोज मुसहर और कृष्ण मुसहर सहित अन्य लोगों ने बताया कि उनके बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र में नामांकित हैं। इनमें सत्यम कुमार, अभिषेक कुमार, अंजनी कुमारी, दीपक कुमार, कल्लू कुमार, मनीषा कुमारी, नंदनी कुमारी, नेहा कुमारी, संजय कुमार, सोनाली कुमारी और सूरज कुमार समेत अन्य बच्चे शामिल हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि केंद्र में कुल 40 बच्चे नामांकित हैं, जिनमें 14 बच्चे महादलित समुदाय से हैं। उनका आरोप है कि 31 बच्चों के बीच पोशाक का वितरण किया गया, जबकि 9 बच्चे अब भी पोशाक से वंचित हैं। उनका कहना है कि यदि पोशाक की कमी थी तो सभी बच्चों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए था, लेकिन सिर्फ महादलित बच्चों के साथ ऐसा होना कई सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र में बच्चों को नियमित रूप से भोजन नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि कई बार बच्चों को भोजन के बजाय केवल बिस्किट देकर घर भेज दिया जाता है। उन्होंने बताया कि पिछले दो महीनों से आंगनबाड़ी केंद्र में भोजन वितरण पूरी तरह बंद है। इस मामले की शिकायत बाल विकास परियोजना पदाधिकारी से भी की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों का कहना है कि मंगलवार को केंद्र में कुल 40 बच्चे मौजूद थे, लेकिन केवल 14 महादलित बच्चों के कपड़े उतरने की बात सामने आई है। इससे उनके मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर सिर्फ उन्हीं बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों हुआ। लोगों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि उनके बच्चों को न्याय नहीं मिला तो वे बाल विकास परियोजना कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन करेंगे।
वहीं दूसरी ओर आंगनबाड़ी सेविका सुनैना कुमारी ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि पिछले दो महीनों से केंद्र को चावल का आवंटन नहीं मिलने के कारण भोजन वितरण बंद है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें बदनाम करने और फंसाने के उद्देश्य से यह पूरा घटनाक्रम रचा गया है।
सेविका का कहना है कि कुछ लोगों ने जानबूझकर बच्चों के कपड़े उतरवाकर उन्हें केंद्र में लाया और कपड़े टेबल पर रखकर वीडियो बनाने लगे। उन्होंने कहा कि यह सब उन्हें फंसाने की साजिश का हिस्सा है और सच्चाई जांच के बाद सामने आ जाएगी।
फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है और लोग प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और बाल विकास विभाग इस मामले की जांच किस प्रकार करता है तथा वास्तविकता सामने आने के बाद दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
India A To Z News इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और जांच से जुड़े हर अपडेट को आपके सामने लाता रहेगा।

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